पूर्व बर्धमान की 8 सीटों से रिपोर्ट : यहां TMC की जमीन खिसक रही है, ध्रुवीकरण का मुद्दा BJP के फेवर में; लोग कहते हैं- बिना कटमनी दिए कुछ काम नहीं होता

‘कोनो ऐमोन काज नेई जेटा बिना काटमनी दिए होये’ (ऐसा कोई काम नहीं है जो बिना कटमनी दिए होता हो)। यह दर्द मंतेश्वर में रहने वाले देवव्रत राय का है। देवव्रत की तरह तमाम ऐसे लोग हैं जो टीएमसी के स्थानीय नेताओं के भ्रष्टाचार से परेशान होकर बीजेपी को एक नई उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि इन लोगों में ममता बनर्जी को लेकर कोई गुस्सा नहीं है। इसलिए टीएमसी मुकाबले में बनी हुई है, लेकिन उसे हर सीट पर बीजेपी से कड़ी टक्कर मिल रही है। देवव्रत कहते हैं, ‘मंतेश्वर में घर बनाओ तो टीएमसी का ग्रुप आ जाता है कि ईंट-पत्थर हमसे लो। स्कूल में दाखिला करवाओ तो पहले उन्हें कटमनी दो। सरकार की स्कीम का कोई कार्ड बनवाना हो या आवास योजना का पैसा लेना हो, बिना पांच-दस हजार दिए काम नहीं हो पाता।’

यहां कई लोग टीएमसी से नाराज हैं। उनका कहना है कि बिना पैसा दिए किसी सरकारी स्कीम का लाभ नहीं मिलता है।

यहां कई लोग टीएमसी से नाराज हैं। उनका कहना है कि बिना पैसा दिए किसी सरकारी स्कीम का लाभ नहीं मिलता है।

मंतेश्वर पूर्व बर्धमान जिले में आता है, यहां की 8 सीटों खंडाघोष ,बर्धमान दक्षिण, रैना, जमालपुर, मन्तेश्वर, कालना, मेमारी और बर्धमान उत्तर पर 17 अप्रैल को वोटिंग है। कभी सीपीएम के दुर्ग रहे बर्धमान ने ममता को भी दिल खोलकर वोट दिए, लेकिन इस बार यहां की हवा में केसरिया रंग साफ महसूस किया जा सकता है। लोगों की बीजेपी के तरफ झुकने की तीन बड़ी वजहें हैं। पहली, टीएमसी के स्थानीय नेताओं के प्रति नाराजगी, दूसरी हिंदु-मुस्लिम ध्रुवीकरण और तीसरी, बीजेपी को एक मौका देने की जिद। उन्हें लगता है कि बीजेपी आकर सब ठीक कर देगी। किसी को कटमनी नहीं देना पड़ेगी। इसलिए वे बीजेपी के साथ खड़े दिख रहे हैं।

मंतेश्वर के अनुव्रत राय कहते हैं, ‘जो टीएमसी के लीडर पहले दस बोरा धान का काम करते थे, आज उनके पास आलीशान बंगले और गाड़ियां हैं। कहते हैं, बोलने को तो यहां 75 फीसद हिंदू आबादी है लेकिन जिला और ब्लॉक लेवल पर अधिकतर पदों पर मुस्लिमों का ही सिक्का चलता है। इसलिए लोग हिंदू पार्टी को जिता रहे हैं। बोले, हमारे बीजेपी के सांसद हैं। आधे लोगों ने तो शायद उन्हें देखा भी नहीं। फिर भी वोट बीजेपी को जाएगा।’ बर्धमान में शहरी इलाकों में तो टीएमसी आगे दिख रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बीजेपी का जोर है।

इस इलाके में करीब 75% हिंदुओं की आबादी है। इसलिए ध्रुवीकरण का मुद्दा जोर पकड़ रहा है। जिसे भाजपा खूब उछाल रही है।

इस इलाके में करीब 75% हिंदुओं की आबादी है। इसलिए ध्रुवीकरण का मुद्दा जोर पकड़ रहा है। जिसे भाजपा खूब उछाल रही है।

बाउरी समुदाय बीजेपी के साथ, इसलिए पार्टी मजबूत

सीनियर जर्नलिस्ट सोमनाथ नंदी कहते हैं, ‘जिले का पिछड़ा समुदाय पहले सीपीएम को वोट करता था, लेकिन अब बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो चुका है। एससी में आने वाले बाउरी समुदाय के बीच बीजेपी ने बीते कुछ सालों में गहरी पैठ बनाई है। जब टीएमसी के नेता एयर कंडीशनर दफ्तरों में आराम फरमा रहे थे, तब यहां आरएसएस और बीजेपी के लोग पिछड़ों को अपने साथ जोड़ने के लिए काम कर रहे थे। पिछड़े समुदाय के बीच पैठ बनाने में टीएमसी से बीजेपी में आए मुकुल रॉय ने बड़ा रोल निभाया। वे टीएमसी की मजबूती और कमी जानते थे। बीजेपी में आने के बाद उन्होंने इस इलाके के पिछड़े समुदाय के बीच रैलियां करनी शुरू कीं। जिसका असर अब जमीन पर दिख रहा है।’

जमालपुर के देवव्रत राय कहते हैं, ‘ बीजेपी काल बैसाखी झरेर मातो आस्चे’। इसका मतलब समझाते हुए कहते हैं, बंगाल में हर बैसाख में एक बार झड़ आती है। जब वो झड़ आती है तो सबका सफाया होता जाता है। बीजेपी की ऐसी ही झड़ इस बार बंगाल में आई है। हालांकि, टीएमसी समर्थक तर्क देते हैं कि दीदी ने जो योजनाएं शुरू कीं और सड़क, पुल-पुलिया बनाए, वैसा काम पहले कभी नहीं हुआ था। इसलिए दीदी ही जीतेंगी।’ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बर्धमान दक्षिण, खंडाघोष और मेमोरी में टीएमसी और बाकी सीटों पर बीजेपी मजबूत नजर आ रही है। 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बर्धमान जिले की चार में से दो लोकसभा सीटें जीत ली थीं और बाकी की दो सीटों पर भी अच्छे-खासे वोट लिए थे।

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