केरल HC ने मिनरल्स एंड मेटल्स की अधिसूचना को पलटा : हाईकोर्ट ने कहा- महिला को यह कहकर रोजगार से वंचित नहीं कर सकते कि उसे रात काे काम करना पड़ेगा

अगर कोई महिला पूरी तरह से योग्य है तो उसे कार्य की प्रकृति के आधार पर रोजगार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह बात कही। जस्टिस अनु शिवरामन ने कहा, “किसी योग्य उम्मीदवार को सिर्फ इस आधार पर नियुक्त करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह एक महिला है और रोजगार की प्रकृति के अनुसार उसे रात में काम करना होगा। जबकि महिला का योग्य होना ही उसकी नौकरी के लिए सुरक्षात्मक प्रावधान है।’

यह फैसला देकर कोर्ट ने केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड की नौकरी के लिए जारी उस अधिसूचना को पलट दिया, जिसमें सिर्फ पुरुष उम्मीदवारों को आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है। जबकि फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के प्रावधान महिलाओं को कार्यस्थल पर शोषण से बचाने के लिए हैं।

याचिकाकर्ता ट्रेजा जोसफीन ने कंपनी की सेफ्टी ऑफिसर की नौकरी की अधिसूचना को चुनौती दी थी। ट्रेजा कंपनी में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी (सेफ्टी) हैं। उन्होंने कहा कि यह अधिसूचना भेदभावपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि हमें कार्यस्थल को बेहतर और समानता वाला बनाना है न कि परिस्थितियों का हवाला देकर महिलाओं को रोजगार के मौकों से वंचित करना है। हमें आधी आबादी को हर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा अवसर देना है।

महिलाओं को सिर्फ घर के काम में ही क्यों लगाए रखें?
अदालत ने कहा, ‘दुनिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें सिर्फ घर के काम में ही क्यों लगाए रखें। हम ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां आर्थिक विकास के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा, उड्‌यन और सूचना प्रौद्योगिकी सहित कई उद्योगों में सभी समय पर काम करने के लिए लगाया जा रहा है। इस तरह की चुनौतियों का सामना कर महिलाओं ने साबित किया है कि वे हर समय किसी भी तरह का कार्य करने में सक्षम हैं।’

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