नॉर्थ 24 परगना की 17 सीटों पर CAA का असर : पहले TMC के वोटर रहे मतुआ समुदाय का झुकाव इस बार BJP की ओर, लेकिन टिकट बंटवारे से नाराज बागी बन सकते हैं परेशानी

नॉर्थ 24 परगना और साउथ 24 परगना ये पश्चिम बंगाल के दो ऐसे जिले हैं, जो यहां सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें जिसने जीत लिया, उसका बंगाल की सत्ता में आना आसान हो जाता है, क्योंकि इन दो जिलों में विधानसभा की 64 सीटें (33 सीटें नॉर्थ 24 परगना और 31 साउथ 24 परगना) आती हैं। टीएमसी ने 2016 में नॉर्थ 24 परगना की 33 में से 27 सीटें जीत ली थीं, इसलिए वो बड़े मार्जिन से चुनाव जीती थी, लेकिन इस बार बीजेपी ने उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। 22 अप्रैल को छठे फेज में नॉर्थ-24 परगना की जिन 17 सीटों पर वोटिंग है, उनमें टीएमसी-बीजेपी में कांटे की टक्कर है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में ममता के साथ रहने वाले इस समुदाय का वोट इस बार बंटता हुआ दिख रहा है और उसका ज्यादा झुकाव बीजेपी की तरफ नजर आ रहा है।

दरअसल, नॉर्थ-24 परगना में मतुआओं की बड़ी आबादी है। देशभर में इनकी आबादी 5 करोड़ बताई जाती है। उसमें से 3 करोड़ बंगाल में रहते हैं। 1 करोड़ 80 लाख वोटर हैं। जातियों के हिसाब से देखें तो एससी श्रेणी में आते हैं और नामशूद्र कहलाते हैं। मतुआ समुदाय की बड़ी आबादी बांग्लादेश से आई है और अभी इसे स्थायी नागरिकता नहीं मिली है। इन्हें साधना कितना जरूरी है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि, कुछ दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी बांग्लादेश गए थे तो मतुआ महासंघ के संस्थापक हरिचंद्र ठाकुर के मंदिर में जाकर भी उन्होंने आशीर्वाद लिया था। मतुआ वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी ने सीएए का कार्ड खेला है।

ठाकुर नगर स्थित मतुआ संप्रदाय के संस्थापक हरिचंद्र ठाकुर का मंदिर। यहां मतुआ समाज के लोगों को अच्छा खासा प्रभाव है।

ठाकुर नगर स्थित मतुआ संप्रदाय के संस्थापक हरिचंद्र ठाकुर का मंदिर। यहां मतुआ समाज के लोगों को अच्छा खासा प्रभाव है।

भाजपा लोकसभा चुनाव के पहले से ही कह रही है कि सीएए लागू कर सभी मतुआ लोगों को स्थायी नागरिकता दी जाएगी। वहीं टीएमसी कह रही है कि हर तरह के कागज हैं तो नागरिकता की जरूरत ही क्या है। मतुआ बहुल बनगांव लोकसभा में आने वाली गायघाट सीट से बीजेपी ने बनगांव सांसद शांतनु ठाकुर के भाई सुब्रत ठाकुर को मैदान में उतारा है। क्योंकि ठाकुर परिवार खुद भी मतुआ समुदाय से आता है और इनका समाज में प्रभाव भी है, लेकिन इसी परिवार से आने वालीं ममता ठाकुर टीएमसी के साथ हैं। ऐसे में मतुआ समाज भी टीएमसी और बीजेपी के बीच बंटा नजर आ रहा है। कुछ आशोल परिवर्तन देख रहे हैं तो कुछ को दीदी का विकास मॉडल अच्छा लग रहा है।

सुब्रत को टिकट मिलने से स्थानीय नेता हुए बागी

मतुआओं के गढ़ ठाकुर नगर में सुब्रत ठाकुर को टिकट मिलने से बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने बगावत कर दी है। वे खुद टिकट चाहते थे। टिकट नहीं मिलने पर कई नेता नई पार्टी बनाकर मैदान में उतर गए हैं। ऐसे में ये बीजेपी के वोट काटते नजर आ रहे हैं। बनगांव की पूर्व सांसद ममता ठाकुर कहती हैं, असम में 19 लाख लोगों को डिटेंशन कैंप में डाल दिया गया। लोकसभा में जीत के बाद भी मतुआ समुदाय को नागरिकता नहीं दी गई इसलिए समाज के लोग अब बीजेपी नहीं टीएमसी को वोट देंगे।

हाल ही पीएम मोदी ने बांग्लादेश स्थित ओरकांडी की मतुआ ठाकुरबाड़ी में पूजा अर्चना की थी।

हाल ही पीएम मोदी ने बांग्लादेश स्थित ओरकांडी की मतुआ ठाकुरबाड़ी में पूजा अर्चना की थी।

दरअसल मतुआ वोटर्स को साधने की कोशिशें बीजेपी ने 2019 में ही शुरू कर दी थीं। तब पीएम मोदी और अमित शाह ने ठाकुर नगर में सभाएं की थीं और मतुओं से वादा किया था कि, सरकार में आते ही आपको स्थायी नागरिकता दे दी जाएगी। इसका नतीजा ये हुआ था कि बीजेपी ने बनगांव और बैरकपुर सीट जीत ली थीं। इसके बाद ममता बनर्जी ने भी मतुआ वोटर्स को अपने साथ बनाए रखने के लिए तमाम कोशिशें कीं।

अधिकतर सीटों पर हिंदू ज्यादा, पोलराइजेशन का असर भी दिख रहा

नॉर्थ-24 परगना जिला हिंदू बहुल है। चुनिंदा सीटों पर ही माइनोरिटी मेजोरिटी में आते हैं। पिछले दो सालों में यहां कई दफा छोटे-मोटे दंगे हुए। चुनाव के पहले भी कई बार बमबारी हुई। इससे ध्रुवीकरण को जोर मिला है, क्योंकि लोगों में एक-दूसरे को लेकर डर आया है। टीएमसी की पूरी कोशिश थी कि ध्रुवीकरण कम से कम हो, क्योंकि इससे बीजेपी को फायदा मिलेगा लेकिन ग्राउंड पर घूमने पर पता चलता है कि ध्रुवीकरण का असर है। जिन 17 सीटों पर वोटिंग होना है, उनमें से 12 सीटें बनगांव और बैरकपुर लोकसभा सीट में आती हैं।

यहां पहले से ही बीजेपी के सांसद हैं। नॉर्थ 24 परगना के सीनियर जर्नलिस्ट फिरोज इस्लाम कहते हैं, ‘हर सीट पर कड़ा मुकाबला नजर आ रहा है। खुद कैंडीडेट भी अपनी जीत की पूरी गारंटी नहीं दे सकते। बीजेपी, टीएमसी से आधी सीटें तो छीनती दिख ही रही है।’ ममता के रणनीतिकार प्रशांत किशोर कह चुके हैं कि, मतुआ समुदाय का झुकाव बीजेपी की तरफ ज्यादा नजर आ रहा है।

नॉर्थ 24 परगना में एक रैली के दौरान सीएम ममता बनर्जी। पिछली बार टीएमसी ने यहां की 33 में से 27 सीटें जीत ली थीं।

नॉर्थ 24 परगना में एक रैली के दौरान सीएम ममता बनर्जी। पिछली बार टीएमसी ने यहां की 33 में से 27 सीटें जीत ली थीं।

जूट मिल में नॉन बंगाली ज्यादा, इससे भी बीजेपी को फायदा

बैरकपुर में कई जूट मिले हैं, जहां हजारों की संख्या में वर्कर हैं। अधिकतर नॉन बंगाली और हिंदीभाषी हैं। बीजेपी ने जूट मिलों को लेकर कई घोषणाएं की हैं। इसलिए ये तबका बीजेपी की तरफ जाता दिख रहा है। टीएमसी को यहां माइनोरिटी वोटर्स के साथ ही मिडिल क्लास सपोर्ट करते दिख रहे हैं, क्योंकि सड़क, पुल-पुलिया से लेकर ममता बनर्जी की स्कीम्स तक को वे पसंद कर रहे हैं। टीएमसी ने नॉर्थ 24 परगना में इस बार बहुत से कैंडीडेट्स को भी बदला है। ताकि एंटी इंकम्बेंसी का फैक्टर न रहे। फिर भी कुछ जगह तो स्थानीय नेताओं के प्रति लोगों में गुस्सा है लेकिन वे ममता से नाराज नहीं दिख रहे। टीएमसी की यहां राह मुश्किल करने का काम कभी टीएमसी में रहे मुकुल रॉय ने ही किया है। वे जिले की नब्ज अच्छे से जानते हैं और उसी हिसाब से बीजेपी का संगठन यहां मजबूत किया।

किन सीटों पर है वोटिंग -नॉर्थ 24 परगना की बागड़ा, बनगांव उत्तर, बनगांव दक्षिण, गायघाट, स्वरूपनगर, बदुरिया, हाबरा, अशोकनगर, अमडांगा, बिजपुर, नैहाटी, भाटपाड़ा, जगतदल, नौपारा, बैरकपुर, खरदाहा और दम दम उत्तर में 22 अप्रैल को वोटिंग है।

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