नक्सल प्रभावित जिले का कोरोना से ये हाल : 2800 रु. की लकड़ी खरीद ली, चिता सजाए परिजन इंतजार करते रहे; 19 घंटे बाद भी अस्पताल ने नहीं दिया शव

देशभर में पिछले 4 दिनों से लगातार 2 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। अकेले महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ 4 राज्य हैं, जहां रोज करीब डेढ़ लाख नए मरीज मिल रहे हैं। संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र के ही 10 जिले ऐसे हैं जहां 10-10 हजार मरीजों को इलाज चल रहा है।

इसी राज्य में नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली और चंद्रपुर भी ऐसे जिले हैं, जहां मरीजों की संख्या तो काफी कम है। हालांकि, चिंता की बात ये है कि ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड की कमी के चलते नागपुर, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए आ रहे हैं।

आज स्थिति ये है कि यहां के 226 बेड वाले सिविल अस्पताल और प्राइवेट हॉस्पिटल में बेड ढूंढे नहीं मिल रहे।

दैनिक भास्कर की टीम पिछले 7 दिनों में करीब 1 हजार किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा कर आपको पुणे, नासिक, औरंगाबाद और नागपुर का हाल बता चुकी है। गढ़चिरौली और चंद्रपुर से भी हमने कल एक रिपोर्ट आप तक पहुंचाई थी। नक्सल प्रभावित इन दो जिलों से आज पढ़ें 8वीं और आखिरी ग्राउंड रिपोर्ट..

गढ़चिरौली के सिविल अस्पताल के कोविड सेंटर के बाहर तीन परिवार एक साथ खड़े हैं। यहां जितने लोगों से बात हो रही है वे सब अपने-अपने रिश्तेदार की डेड बॉडी लेने आए हुए हैं। मुंबई से जब हमने यह यात्रा शुरू की थी तो आंकड़े बताते थे कि गढ़चिरौली और चंद्रपुर जैसे नक्सल प्रभावित और ग्रामीण इलाकों में कोविड के केस अपेक्षाकृत कम हैं। लेकिन यहां आने पर स्थिति उतनी ही खराब लग रही है जितनी महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में है।

गढ़चिरौली के ही रहने वाले श्याम बाबू के करीबी रिश्तेदार की कोविड से शाम 5 बजे मौत हो चुकी है। अभी दूसरे दिन के 12 बज चुके हैं, लेकिन उन्हें डेड बॉडी नहीं मिली है। वे दाह संस्कार के लिए लगभग 2800 रुपए की लकड़ियां ले चुके हैं। श्मशान में चिता तैयार करके यहां आए हैं।

19 घंटे से शव लेने के लिए इधर-उधर भटक रहा हूं, लेकिन अस्पताल बॉडी नहीं दे रहे। श्याम बाबू कहते हैं… शव कब मिलेगा, कौन देगा, किससे बात करनी है कोई नहीं बता रहा। इनके जैसे बहुत सारे लोग अपने-अपने रिश्तेदारों की डेड बॉडी लेने के लिए कतार में हैं, लेकिन प्रशासनिक अमला नदारद है।

10 दिन पहले तक यहां बेड आसानी से मिल जाता था
एक फोर्थ क्लास कर्मचारी नाम न बताने की शर्त पर बता रहे हैं कि मैडम.. बीती रात से लेकर अभी तक (दोपहर के 11 बजे हैं) 21 मौतें हो चुकी हैं। नागपुर जैसे जिलों में बेड की कमी होने से मरीज गढ़चिरौली के इस 226 बेड वाले अस्पताल में आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से भी मरीज आ रहे हैं।

हालांकि, यहां बेड के लिए लोग कतार में तो नहीं हैं, लेकिन अस्पताल में जगह भी नहीं है। यहां बीते 10 दिन तक के हालात ऐसे थे कि आसानी से बेड मिल जाता था, लेकिन अब यहां भी बेड के लिए मारामारी है। मैं जितनी देर इस अस्पताल में रही जिससे भी बात की हर कोई यही बोला कि उसका कोई खास मर गया है और वह बात करने की स्थिति में नहीं है।

सतीश का कहना है कि उनकी मां की अभी-अभी मौत हुई है। अस्पताल में सिर्फ मौत दिख रही है। बॉडी दे नहीं रहे हैं। गढ़चिरौली के पास कुरखेड़ा के कुणाल बताते हैं उनके 51 वर्षीय रिश्तेदार की कोरोना से मौत हो गई है। टेस्ट किया, इलाज चल रहा था लेकिन जान नहीं बची।

उनकी पत्नी को भी कोरोना है। कुणाल का कहना है बेड और ऑक्सीजन मिलने में तो कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन इलाज में लापरवाही हो रही है।

रात को ऑक्सीजन कम हो जा रही है ,चंद्रपुर में रोज 20 मौतें
कमोबेश यही हालत चंद्रपुर में है। तालुका वरोडा में 300 लोगों की मौत हो चुकी है। चार-पांच दिन से बुखार आ रहा है। चंद्रपुर में भी कोई बेड खाली नहीं है। ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी है। बेड की कमी से अब मरीज यहां से वापस जा रहे हैं। ऑक्सीजन रात में कम हो जाती है। जिस वजह से मौतें हो रही हैं। हर दिन यहां 20 लोग दम तोड़ रहे हैं।

इलाज में लगे अमले पर ओवरलोड इतना है कि इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा है। कुछ दिन पहले यहां एक दिन में 13 लोगों की मौत हुई। इस पर चंद्रपुर के अविनाश खुद कलेक्टर से मिलने गए कि चंद्रपुर में इतनी मौतें क्यों हो रही हैं। कलेक्टर ने हालांकि दिलासा ही दी। ऑक्सीजन की कमी से यहां 15 से 20 मौतें रोज हो रही हैं।

कोरोना से नहीं मरे तो भूख से मर जाएंगे
लोग लॉकडाउन से परेशान हैं, क्योंकि गरीब इलाका है। रोज कमाने खाने वाले लोग हैं। शिवभोजन में दो रोटी और थोड़ा सा चावल मिलता है। वो भी एक जन को। उससे परिवार का पेट भरता है क्या। राशन बंद है। हरिनारायण बताते हैं कि तेल, गैस, दाल सब मंहगा है। खाएंगे क्या। कोरोना से नहीं मरे तो भूख से मरेंगे।

11.66 लाख की आबादी, रोज 1400 टेस्ट
11 लाख 66 हजार 494 जनसंख्या वाले गढ़चिरौली में लगभग रोज के 1400 टेस्ट किए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि एक दिन में लगभग 195 से 200 लोग कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं। यहां का कोरोना पॉजिटिविटी प्रतिशत 6.31 है। गढ़चिरौली में कोविड के कुल केस 12,940 हैं। इनमें से एक्टिव केस 2,162 हैं।

महाराष्ट्र के बाकी जिलों की अपेक्षा हालांकि यह आंकड़ा बड़ा नहीं लगता है, लेकिन ग्राउंड पर जाकर देखो तो तस्वीर भयावह है। गढ़चिरौली के सांसद अशोक नेते बताते हैं कि कोरोना सिर्फ गढ़चिरौली का टॉपिक नहीं है। पूरी दुनिया का विषय है। सब जगह की तरह यहां भी फैल रहा है। हालांकि यहां के हालात नागपुर जैसे नहीं हैं।

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